ये देश का संयोजन मात्र एक राजनीतिक घटना नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सांस्कृतिक नवजागरण का सूत्रपात भी है। विभिन्न भाषाओं के समन्वय से अद्भुत भारतीय चेतना का निर्माण हो रहा है। यह नवजागरण न केवल साहित्य के क्षेत्र में, बल्कि सामाजिक विचारों के विश्लेषण में भी दिखाई दे रहा है, जो सशक्त देश के निर्माण